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ब्राह्मण की प्रार्थना सुनकर रुका सुर्यदेव का रथ

चन्दौली- जनपद के विभिन्न तालाबो जैसे -मानसरोवर तलाब,कैली गंगा के समीप,दामोदर दास पोखरा,मालगोदाम तालाब सहित जनपद के सैकड़ो तालाबो के समीप पर बुधवार की शाम को स्त्रियों के द्वारा जिउतिया पूजा करने की भीड़ सी लगी रही ।

जिउतिया का ब्रत आश्विन मास के कृष्ण -पझ की अष्टमी को किया जाता है, यह जिउतिया का ब्रत बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है । इस ब्रत को प्रमुख रूप से स्त्रीयां अपनी संतान की लबीं आयु के लिए आज के दिन सूर्य नारायण की पूजा करती है, स्त्रियां भगवान् सूर्य की मूर्ति को भी स्नान करवा कर बाजरा और चने से बने पदार्थो व फल का भोग लगा कर वितरण करती है ।स्त्रियां इस ब्रत को पुत्र की लम्बी आयु के लिए के लिये रखती है,और मान्यता है कि इस ब्रत से मृतवत्सा दोष को दूर करता है.

क्यो मनाती है,स्त्रियां जिवतियां पर्व ?

भगवान कृष्ण द्वारिका पुरी में निवास किया करते थे ,उस समय एक ब्राहा्ण भी द्वारिका में निवास किया करते थे, ब्राहा्ण के पास सात पुत्र थे जो कि बचपन में ही मर चुके थे, उसे मृतवत्सा दोष लगा था, इस कारण वो ब्राह्मण काफी दुखी रहता था । एक दिन वह ब्राह्मण भगवान कृष्ण के पास गया और कहने लगा – हे भगवन आपके राज्य मे आपकी कृपा तो अपरम्पार है ।मेरी पत्नी सात पुत्रो का जन्म दी ,


परन्तु जिवित कोई नहीं रहा .क्या कारण है? मैं काफी दुखी हुँ,आप अपने राज्य मे किसी को दुखी नहीं देखना चाहते हो तो कृपया मुझे कोई उपाये बताये ।
तब भगवान कृष्ण बोले – हे ब्राह्मण ! सूनो इस बार तुम्हारे जो पुत्र होगा उसकी आयु मात्र तीन वर्ष की ही है, इसकी उम्र बढ़ाने के लिए तुम सूर्य नारायण की पूजा वाले पुत्रजीवी ब्रत को धारण करो तुम्हारी पुत्र की आयु बढ़ेगी ।इसे सुनकर ब्राह्मण बड़ा खुश हुआ और ब्राह्मण ने वैसा ही किया जब वह सपरिवार विनती कर रहा था –

सूर्य देव सूनो विनती हमार,पाउ पुत्र सुख अपार,"उम्र बढ़ाओ पुत्र की कहता एक ब्राह्मण"

इतना सुनते ही सूर्य का रथ यहॉ रूक गया, ब्राह्मण की विनती से प्रसन्न होकर सूर्य ने अपने गले का एक माला उत्तार कर ब्राह्मण पुत्र के गले में पहना दी और आगे की तरफ चले गये,उसके थोड़ी ही देर बाद में यमराज उस ब्राह्मण पुत्र के प्राण लेने आये यमराज को देखा कर ब्राह्मण व उसकी पत्नी दोनो कृष्ण को झूठा कहने लगे, भगवान कृष्ण अपना अनादर कर तुरन्त आ गये, और बोले इस माला को यमराज के ऊपर डाल दो, इतना सुनते ही ब्राह्मण ने उस माला को उत्तार करने लगा । यह देखकर यमराज डर से भाग गये तुरन्त यमराज की छाया वही रह गयी .ब्राह्मण ने उस फूल की माला को छाया के ऊपर फेक दिया ,जिसके फलस्वरूप वह छाया शनी के रूप में आकर भगवान कृष्ण की प्रार्थना करने लगे. भगवान कृष्ण को उस पर दया आ गई उन्होनें उस पर दया कर पिपल के वृक्ष पर रहने के लिए कहा तब से शनी की छाया पिपल के वृक्ष पर निवास करने लगी इस प्रकार भगवान कृष्ण ने जिवितपुत्रिका व्रत के द्रारा ब्राह्मण के पुत्र की उम्र बढ़ा दी इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने वाले मृतवत्सा दोष से बचा जा सकता है

नरेंद्र गुप्ता (चंदौली)

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